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कृषि सलाह: अगर आप के गेहू की पत्तियां पड़ रहीं हैं पीली,रखें इन खास बातों का ख्याल

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कृषि सलाह: अगर आप के गेहू की पत्तियां पड़ रहीं हैं पीली,रखें इन खास बातों का ख्याल
अभी के लिए गेहू के लिए क्या जरूरी काम करे यह किसानों के लिए जानना सबसे जरूरी होता हैं। आइये जानते हें की किसानों के कई सवालों के जवाब इस खबर में पूरी जानकारी के साथ बताया गया हैं।

कृषि सुझाव:भारत में लगभग काफी एरिया में गेहू कि बुवाई की जाती हैं। इसे में किसानों के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान का रखना आवश्यक होता हैं। आप को बता दे की जैसे की सिंचाई कब करनी हैं,खरपतवार के लिए क्या नियंत्रण करना चाहिए।अभी के लिए गेहू के लिए क्या जरूरी काम करे यह किसानों के लिए जानना सबसे जरूरी होता हैं। आइये जानते हें की किसानों के कई सवालों के जवाब इस खबर में पूरी जानकारी के साथ बताया गया हैं। 

आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट:-

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान किसानों के लिए हर हफ्ते के लिए समाचार भी जारी करता है। संस्थान के मुताबिक आनुवांशिकी संभाग के वैज्ञानिक डॉ राजवीर यादव का मानना हैं की इस समय किसान गेहू के लिए क्या जरूरी काम करें। बहुत सारे किसानों की लगभग ये समस्या आती है कि वो गेहू कि फसल में ज्यादा हर्बीसाइड या खरपतवार निरोधी दवाओं का छिड़काव करते हैं तो इस से गेहूं की फसल में पीलापन भी आ जाता है,ओर इस से किसानों को लगता है कि कहीं उनकी फसल में पीला रतुआ रोग तो नहीं आ गया है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होता है,क्योंकि पीला रतुआ रोग में गेहू की पत्ती पाउडर जैसा नजर आता है और जबकि दूसरे में जब आप गेहू की पत्ती रगड़ोगे तो ऐसा कुछ नजर नहीं आता है।

ऐसे में वैज्ञानिक के सुझाव के मुताबिक किसान को सुझाव देना चाहूँगा कि जब भी आप को खरपतवार निरोधी दवाओं का इस्तेमाल करना हो तो एक एकड़ के हिसाब फार्मूलेशन बनाएं उसमें 500 ग्राम के करीब यूरिया भी मिला लें,अगर फिर भी समस्या का कोई समाधान न हो तो बाजार के अंदर सी वीड कंपनी का एक्सट्रैक्ट को एक एकड़ में छिड़काव भी  कर दें। किसानों की जानकारी के मुताबिक बता दे की अगर आप खरपतवार का आप इस्तेमाल कर रहे हैं,तो इसका प्रयोग गेहूं की शुरुआती अवस्था और बुवाई के 17-18 दिन बाद ही छिड़काव करें।अगर गेहूं की पहली सिंचाई की बात करे तो गेहू की सिंचाई बुवाई के 20-22 दिन बाद ही करे,और अगर आप के क्षेत्र में हैं जहां लॉजिंग की समस्या भी हो तो   वहां पहली सिंचाई गेहू की बुवाई के लगभग 25-27 दिनों के बाद ही करे। जिस क्षेत्र में

जहां नमी अधिक रहती है वहाँ पर पहली सिंचाई 27 -28 दिन बाद ओर दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के लगभग 27-28 दिन बाद ही करें। आखिरी दो सिंचाई के बीच लगभग 20 दिन का अंतराल रखें। जिन्होंने भी गेहू की बुवाई एक नवंबर के आसपास या अक्टूबर के आखिर में की हो उस फसल की अच्छी बढ़वार होती है।अगर बात करे तो कई बार तो फसल गिर भी जाती है इसलिए उसमें जब भी पहली गांठ आती है,तो उसमें एक कट भी लगा सकते हैं। उस कट को आप चारे के रूप में इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इससे आपको प्रति हेक्टेयर 70-1000 कुंतल हरा चारा भी मिल सकता है। भारतीय कृषि वैज्ञानिक की सलाह के मुताबिक अधिक उपज के लिए गेहूं की फसल को पांच-छह सिंचाई की आवश्यक होती है।

गेहू में पानी की उपलब्धता,मिट्टी के प्रकार और पौधों की आवश्यकता के हिसाब से ही  सिंचाई करनी चाहिए। गेहूं की फसल के जीवन चक्र की बात करे तो इस में तीन अवस्थाएं जैसे चंदेरी जड़े निकलना (21 दिन),पहली गांठ का बनना (65 दिन) और दाना बनना (85 दिन) ऐसी हैं, जिन पर सिंचाई करना अतिआवश्यक भी होता है। यदि सिचाई के लिए जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो तो पहली सिंचाई 21 दिन में ओर  पर इसके बाद 20 दिन के अंतराल पर अन्य पांच सिंचाई भी करें।

नई सिंचाई तकनीकों के मुताबिक जैसे फव्वारा विधि या टपका विधि भी गेहूं की खेती के लिए काफी उपयुक्त भी है।अगर कम पानी क्षेत्रों की बात करे तो फव्वारा विधि या टपका विधि का प्रयोग बहुत पहले से होता आ रहा है।सकता है और अच्छी उपज ली जा सकती है। सिंचाई की इन तकनीकों पर केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी के रूप में अनुदान भी दिया जा रहा है। किसान भाईयों को इन योजनाओं का लाभ लेकर सिंचाई जल प्रबंधन के राष्ट्रीय दायित्व का भी फायदा भी ले सकते हैं।