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Cotton Farming: कपास के किसानों की बढ़ी मुश्किल, अब बड़ी आफत बनी ये नई मुसीबत

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Indiajobpost: इस बार महाराष्ट्र के कपास उत्पादकों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। क्योंकि पहले बारिश के चलते किसानों को काफी नुकसान हुआ उसके बाद मंडी में उचित भाव ना मिलने के कारण भी किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पहले तैयार फसल पर कई जिलों में बारिश के चलते फसलें तबाह हो गई। अब चुगाई का काम बचे हुए जिलों में जारी है। इसी बीच नंदुरबार जिले में किसानों द्वारा काटी गई कपास की फसलों पर चोरों की बड़ी पैनी नज़र है. जिले में कई किसानों की फसल अब चोरी हो रही है.     

तो वहीं दूसरी ओर कई जिलों में मजदूरों की कमी के कारण कपास की चुगाई नहीं हो पा रही है. ऐसे में उत्पादकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. किसान प्रशासन से भी मांग कर रहे है कि जल्द ही चोरों को खिलाफ कोई सख्त कदम उठाये .

इस समय कपास की चोरी किसानों के लिए बहुत बड़ी समस्या

देश भर में कपास को मुख्य नकदी फसल के रूप में देखा जाता है. बीते साल कपास को अच्छी कीमत मिलने के कारण इस वर्ष बड़ी संख्या में किसानों का रूझान कपास की खेती की ओर भी रहा है. लेकिन अब कपास चोरी की एक बड़ी समस्या किसानों के सामने खड़ी हो गई है . कपास की भविष्य में अच्छी कीमत के चलते अब चोर अब कपास चोरी करने लगे है. रात में चोरों के गिरोह खेतों में घुसकर कपास को उठा रहे हैं. इससे किसानों में भारी भय भी बना हुआ है. दूसरी ओर मजदूरों की अनुपलब्धता के कारण कपास की समय पर चुगाई नहीं की जा पा रही है.

रोजगार की तलाश में मजदूरों का हुआ पलायन

बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार की तलाश में गुजरात मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर भी चले गए हैं. इससे स्थानीय मजदूरों की कमी के चलते किसानों को 40 से 45 किलोमीटर दूर से मजदूरो को भी लाना पड़ रहा है. इससे स्वीकृत के परिवहन की लागत अब बढ़ गई है. इससे जिले के कपास उत्पादक किसान दोहरे संकट में है. और किसानों ने मांग की है कि पुलिस कपास चोरी करने वाले गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे. मजदूरों की कमी के कारण कपास की चुगाई समय पर नहीं हो पाती और वह चोरों की राह पर आ जाती है. इससे किसानों को भारी आर्थिक भी नुकसान हो रहा है.

किसानों ने मांग की है कि प्रशासन यह शर्त लगाए कि कपास की खुदरा खरीदारी करने वाले व्यापारी किसानों से ही सीधे कपास खरीदें. कुछ किसानों का कहना है कि चुगाई नहीं होने की वजह से फसल कही बारिश आने से खराब न हो जाए.