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Egyptian Clover: सर्दियों में दुधारू पशुओं के लिए फायदेमंद होता है यह चारा, इतने दिन में हो जाता है तैयार

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आज के दौर में किसान सीमित समय में अधिक मुनाफे वाली वाली फसल की खेती की और अधिक ध्यान दे रहे है। तो आ हम इस लेख में बरसीम की खेती के बारे में विस्तार से जानेगे। बरसीम चारे के लिए उपयोग होने वाली एक दलहनी फसल है। बरसीम हरे चारों में अपने गुणों द्वारा दुधारू पशुओं के लिए प्रसिद्ध भी है जो बहुत ही पौष्टिक व स्वादिष्ट चारा भी है। इसका चारा अत्यन्त मुलायम, स्वादिष्ट एवं प्रोटीन और खनिज तत्वों से भरपूर भी होता है। बरसीम में प्रोटीन की औसत मात्रा 17-21 % तक होती है। इसको देश में चारे की फसलों का राजा भी कहा जाता है। इसकी उत्पति स्थान एशिया माइनर के देश ही माने जाते हैं। देश के राजस्थान के कुछ भागों में भी इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

बरसीम की फसल के लिए जलवायु

बरसीम को आमतौर पर रबी की फसलों के साथ उगाया जाता हैं।  इसके लिए शीतोष्ण कम गर्मी वाले क्षेत्र ही उपयुक्त रहते है इसकी फसल के लिए 25-26° सेल्सियस तापमान बहुत बढ़िया रहता है।

बरसीम की खेती के लिए मृदा एवं खेत की तैयारी

आमतौर पर बरसीम की खेती के लिए जल निकास युक्त दोमट से चिकनी दोमट मृदा ही सर्वोतम रहती है। वही पीएच मान 7 से ऊपर की मृदाएँ इसके लिए सर्वोतम मानी जाती है। किसानों को एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा दो-तीन जुताई देशी हल से करनी चाइए। बरसीम का बीज बहुत छोटा भी होता है, अतः बीजाई से पहले मिट्टी भुरभुरी कर लेनी चाहिए।

बरसीम की उन्नत किस्में

  • खदरावी
  • फहाली
  • पूसा जाइन्ट
  • टी-780
  • वरदान
  • मसकावी

राजस्थान राज्य के लिए वरदान, मसकावी किस्में सबसे उपयुक्त पाई गई है । 

बरसीम के लिए बीजदर एवं बीजोपचार 

बरसीम की खेती के लिए 25-30 किग्रा बीज प्रति हैक्टर की जरूरत होती है। बरसीम के बीजों मे कासनी नामक खरपतवार के बीज मिले होते है। अतः बुआई पूर्व 5 प्रतिशत नमक के घोल में डालते हैं। बरसीम के कमजोर बीज व कासनी के हल्के बीज होने के कारण ऊपर तैरते है। बरसीम के बीज अपेक्षाकृत वजन में भारी होने कारण नीचे बैठ जाते है जिन्हें निकालकर साफ पानी से धोकर सुखा लेते है। बरसीम के बीजो को राइजोबियम कल्चर से भी उपचारित बुआई करनी चाहिए। 1 लीटर पानी में 15 ग्राम गुड़ का घोल गर्म कर तैयारइसे  कर ठण्डा करे फिर इसमें एक पैकेट कल्चर को अच्छी तरह से मिला दे।  इसके बाद इन बीजो को छाया मे सुखाकर खड़े पानी मे छिटक कर बोए ताकि तेज हवा से बीज न उड़े। इसके तुरन्त बाद भी सिंचाई करें।

बरसीम की बुआई का समय एवं विधि (

बरसीम की बुआई के लिए अक्टूबर माह एकदम उपयुक्त है देश में बरसीम की बुआई दो प्रकार से की जाती है। छिटकवाँ विधि इसे समस्त खेत मे क्यारियाँ बनाकर 5-7 सेमी. पानी भरकर रेक चलाकर कीचड़ कर देते है फिर इसके बीज को छिड़क देते है या समतल क्यारियों मे बीज छिड़कर रेक चलाकर मिट्टी मे मिला देते है और बाद में क्यारियों में 5 -7 सेमी. पानी भरते हैं। बरसीम का बीज छोटा होने के कारण कतारों में बुआई बहुत कठिन होती हैं।

बरसीम की खेती के लिए खाद एवं उर्वरक 

20 टन प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद बुआई के एक महीने पहले खेत में डाल दें। चारे की ज्यादा पैदावार के लिए 20 किग्रा. नाइट्रोजन व 30-40 किग्रा. फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से बुआई से पूर्व डाले प्रत्येक कटाई के बाद 4 किग्रा. नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर तक जरूर दे।

बरसीम की सिंचाई 

बरसीम की खेती मे 8 -10 सिंचाइयों की आवश्यकता भी होती है। पहली दो सिंचाइयाँ बुआई के तुरन्त बाद या 5 -7 दिन के अन्तराल में करें बाद में सर्दियों में 15-20 दिन एवं गर्मियों में 8-10 दिन के अन्तराल पर जरूर करनी चाहिए।

बरसीम की अन्तरा कृषि

बरसीम मे मुख्य खरपतवार कासिनी के पौधे भी होते हैं, इसलिए कासिनी को अन्य खरपतवारों के साथ सिंचाई के बाद हाथ से भी उखाड़ देना चाहिए अगर कासिनी की अधिक मात्रा हो तो डाइनोसेल एसीटेट (घुलनशील पाउडर) 1.5 किग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा 0.2 कि.ग्रा आक्सीफ्लोरफेन प्रति हैक्टर बुआई के बाद व अंकुरण से पूर्व छिड़काव करने से फसल में खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण भी होता है।

बरसीम के लिए पादप संरक्षण

बरसीम की खेती मे रोमिल इल्लियों का प्रकोप अधिक होता है ऐसी अवस्था मे फसल काटकर जानवरों को खिलाना ही उचित रहता है कटाई के बाद भूमि पर रोलर चलाकर सिंचाई करने से कीट रोलर की नीचे दबकर पानी में डूबकर मर भी जाते हैं। बरसीम में कोई खास रोग भी नही लगते है कभी कभी गेरूई व जड़ सड़न रोग लग जाते हैं, इसके लिए उचित फसल चक्र के रास्ते को अपनाने चाहिए ।

बरसीम की कटाई 

अगर बरसीम की अगेती फसल हो तो कटाई 45 – 50 दिन पर ही करें ताकि दूसरी कटाई जल्दी से ले सकें। सर्दियों में कटाई 30 दिन के अन्तराल में ही करनी चाहिए एव गर्मियों के मौसम में में 20 दिन के अन्तराल पर करें।

बरसीम की उपज 

बरसीम की उपज 800 – 1000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। यदि फरवरी के बाद फसल बीज के लिए छोड़ी गई है तो 5 – 6 क्विंटल बीज तथा 400 – 500 क्विंटल हरा चारा प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त हो जाता है।

 

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