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कड़ाके की ठण्ड में पाला पड़े तो किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए करे ये उपाये

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कड़ाके की ठण्ड में पाला पड़े तो किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए करे ये उपाये
देश में इन दिनों कड़ाके की सर्दी व पाळे का कहर जारी हैं। तो इन दिनों किसानों को अपनी फसलों का खास तोर पर ख्याल रखना अति आवश्यक हो जाता हैं। महाजन क्षेत्र में पड़ रही कड़ाके की ठंड व पाले से फसलों को बचाने के लिए कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है।

NEW DELHI: देश में इन दिनों कड़ाके की सर्दी व पाळे का कहर जारी हैं। तो इन दिनों किसानों को अपनी फसलों का खास तोर पर ख्याल रखना अति आवश्यक हो जाता हैं। महाजन क्षेत्र में पड़ रही कड़ाके की ठंड व पाले से फसलों को बचाने के लिए कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। साथ ही पाले की तीव्रता से फसलों को बचाने के लिए किसानों को उपाय भी बताए हैं

सहायक कृषि अधिकारी अब्दुल अमीन ने बताया कि इस बार मौसम के मिजाज को देखते हुए जाहिर है कि ठण्ड अधिक पड़गी । पाळा पडऩे से कृषि की फसलों व उद्यानिकी फसलों पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ता है। विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार उत्तर भारत में मध्य दिसंबर से मध्य फरवरी तक अधिक पाळा पड़ता है। रबी की फसलों में आलू,मटर,बैंगन ,सरसों, टमाटर, अलसी, धनिया, जीरा, अरहर, शकरकंद तथा फलों में आम व पपीता ठण्ड के प्रति अधिक संवेदनशील होते है। पाले की अधिक तीव्रता होने पर गेंहू, जौ, गन्ना आदि की फसलें भी इसकी चपेट में आ जाती है।

ठण्ड का पूर्वानुमान:

किसानों को ध्यान रखना चाहिए की कब  पाला गिरने वाला है या नहीं,इसका अनुमान भी लगाया जा सकता है। आप को बता की जब विशेष ठण्ड हो, और दिनभर ठण्डी व तेज हवा चले और शाम को हवा चलना अचानक रुक जाए,और रात्रि में आकाश साफ हो और वायुमण्डल में नमी की मात्रा भी कम हो। ऐसी स्थितियां उस रात में पाला गिरने की संभावना अधिक होती हैं। अगर पाला की बात करे तो रात में विशेषतया 12 से 4 बजे के बीच पड़ता है।


किसान अपनी फसलों का पाले से ऐसे करें बचाव:

धुंआ करना: पाला पड़ने का पूर्वानुमान होने पर खेत की उत्तरी दिशा में अर्धरात्रि में सूखी घास-फूस, सूखी टहनियां, पुआल आदि को आग लगाकर धुंआ करने से फसलों को पाले से बचाया भी जा सकता है। जितना अधिक खेत में धुंआ फैलेगा,उतना तापमान भी  ही अधिक बना रहेगा। इस से फसलों को पाले से बचाव हो जाता हैं। 

सिंचाई करना: अगर पाले का पूर्वानुमान होने पर खेत में हल्की सिंचाई कर देने से भूमि में गर्म व नम बनी रहती है। सिंचाई करने से भूमि का तापमान 0.5 डिग्री सेल्सियस से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। किसानों के पास अगर फव्वारा सिंचाई की सुविधा हो तो फव्वारा द्वारा सिंचाई करना भी लाभदायक साबित होता हैं।  

गंधक के तेजाब का प्रयोग : जिस दिन पाला गिरने की सम्भावना हो तो उस दिन फसलों पर गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें। एक लीटर गंधक के तेजाब में   1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर में छिड़काव करें। गंधक के तेजाब का असर दो सप्ताह तक बना रहता है।

पौधशाला के पौधों का ठण्ड से बचाव: अगर पौधशाला में पौधे छोटी अवस्था में होते है। जिसके कारण कम तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील भी होते है। इस कारण से नर्सरी में ठण्ड से अधिक नुकसान भी होता है। नर्सरी के पौधों को ठण्ड से बचाने के लिए पौधों को रात्रि के समय बोरी के टाट या घास-फुस से ढ़क कर रखे दें। पौधों को ढकते समय इस बात का खास तोर पर ध्यान जरूर रखें कि पौधों का दक्षिण-पूर्वी भाग खुला होना चाहिए।ताकि पौधों को सुबह व दोपहर को धूप भी मिलती रहे। पौधशाला में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर से भी ढक कर भी पाले से बचाया जा सकता है। पौधशाला में छप्पर बनाकर भी पौधों को ठण्ड से बचाया जा सकता है। खेत में रोपित पौधों के थावलों के चारों ओर कड़बी या मूंज की टाटी बांधकर भी पौधों का पाले से नुकसान होने से बचाया जा सकता है।