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धान में बौनेपन की बीमारी से भारी नुकसान, कई जिलों में किसानों को 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

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देश में इस समय खरीफ सीजन जारी है। और लगभग धान की रोपाई और बुवाई का काम पूरा भी हो चुका है। तो वही अगेती धान की किस्म के पौधे बड़े भी हो गए है। इसी बीच बीते दिनों पंजाब राज्य के कई इलाकों में धान के पौधे में बौने रोग की बीमारी के कई मामले सामने आए थे। इस बीमारी से पौधों का विकास रुक जाता है। और यह बीमारी मौजूदा समय में पंजाब में अधिक तेजी से अपने पैर प्रसार रही है. और धीरे-धीरे पंजाब के कई क्षेत्रों में धान के पौधों के बौने की सूचना सामने आ रही है. जिसके बाद से राज्य के किसानों की मुश्किलें भी काफी बढ़ी हुई हैं.

पंजाब के इन जिलों से सामने आ रहे हैं मामले

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब पूरे राज्य में सामान्य धान और बासमती धान के खेतों में पौधों के बौने होने की शिकायत अब लगातार आ रही हैं. जिसमें मुख्यत: पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, रोपड़, मोहाली, होशियारपुर, पठानकोट, गुरदासपुर लुधियाना से ज्यादा मामले सामने आए हैं. इसमें लुधियाना के विभिन्न ब्लॉक से धान के बौने पौधों की घटनाएं अधिक सामने आई हैं. 

फसल बौनेपन  बीमारी की चपेट में आने से खराब रकबा 
लुधियाना ब्लॉक-300 हेक्टेयर
खन्ना-1,500 हेक्टेयर
समराला -1,100 हेक्टेयर 
मच्छीवाड़ा-400 हेक्टेयर
दोराहा और मंगत-प्रत्येक 50 हेक्टेयर
सिधवान बेट ब्लॉक-100 हेक्टयर 

लुधियाना जिले के किसानों को 51.35 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक लुधियाना में इस सीजन में राज्य का सबसे ज्यादा 2,58,600 हेक्टेयर रकबे में धान उगाया गया है. वहां इस बीमारी के कारण से 3,500 हेक्टेयर से ज्यादा की फसल खराब भी हो गई है. जो धान के कुल रकबे के क्षेत्रफल का लगभग 1.35 % है. रिपोर्ट के अनुसार यदि फसल उपज पैटर्न और मूल्य निर्धारण को ध्यान में रख कर देखा जाए तो अकेले लुधियाना जिले के किसानों को अब तक 51.35 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. इसका प्रमुख कारण यह है कि बौने रोग की वजह से कम से कम 2,51,720 क्विंटल धान की उपज पहले ही बीमारी की चपेट में आ चुकी है. फसल वर्ष 2021-22 में, लुधियाना जिले में 7,192 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर धान की उपज दर्ज भी की गई थी और वर्ष 2022-23 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,040 रुपये प्रति क्विंटल तक तय किया गया है.

किसी चीनी वायरस के कारण फैली यह बीमारी

बीते महीने जब बौने रोग के मामले धान की फसल में सामने आए थे, तब इसे अज्ञात बीमारी के तौर पर चिन्हित किया गया था. लेकिन,बीते दिनों पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने धान के पौधों में बौनेपन की इस बीमारी को साउथ राइस ब्लैक-स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस (SRBSDV) का नतीजा भी माना था. वहीं वैज्ञानिकों ने शोध में पाया था कि यह बीमारी उन पौधों में लगी है, जिन्हें 25 जून से पहले खेत में बोया गया था. वैज्ञानिकों के अनुसार बौना रोग एक डबल-स्ट्रैंडेड आरएनए वायरस के कारण पनपता है, जिसे पहली बार 2001 में दक्षिणी चीन से ही रिपोर्ट किया गया था. चावल के साथ-साथ जीनोम संरचना पर उत्पन्न होने वाले लक्षण चावल के काले-धारीदार बौने वायरस के समान ही होते हैं.

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