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Radish Cultivation: केवल 10 हजार का खर्च और 1.5 लाख तक कमाई, यह तरीका अपनाएं मूली की खेती में

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Indiajobpost, New Dehli: भारतीय किसान कई कारणों के चलते धीरे धीरे बागवानी की फसलों की और अधिक रुख कर रहे है। किसान अलग-अलग सब्जियों की फसल लगाते हैं, जो पारंपरिक फसलों मे लगने वाले समय में कई बार उत्पादन दे देती है. अभी देश में किसान खरीफ फसलों के फसल प्रबंधन पर लगे हुए है, जिसके बाद रबी फसलों की बुवाई का काम किया जाएगा. रबी सीजन मूली की खेती करके किसान अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं.

आपको जानकारी के लिए बता दें कि मूली की फसल सिर्फ 40 दिन में 250 क्विंटल तक उत्पादन भी दे सकती है. इसकी खेती में लागत को बेहद कम आती ही है, वहीं एक हेक्टेयर खेत से किसानों को 1.5 लाख  तक की मुली की फसल की पैदावार हो सकती है. इस तरह मूली की खेती से अच्छा मुनाफा कमाने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है.

मूली की खेती के लिए कैसी जलवायु उपयुक्त 

जैसा कि आप जानते मूली एक कंद फसल है, जो जमीन के अंदर पैदा होती है और इसके पौधे जमीन के ऊपर तक निकलते हैं. इसकी फसल का हर हिस्सा बाजार में बढ़िया कीमतों पर बिकता है. करीब 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान यानी सर्द मौसम में मूली के पौधों का बेहतर विकास होता है. वहीं फसल से अधिक पैदावार के लिये जल निकासी वाली गहरी बुलाई दोमट मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ वाली वर्मी कंपोस्ट खाद का इस्तेमाल करके भी किसान मूली का बेहतर उत्पादन ले सकते हैं.

देश में मूली की उन्नत किस्में 

वैसे तो भारत में मूली की कई किस्में मिट्टी और जलवायु के अनुसार अलग-अलग इलाकों में उगाई जाती हैं, लेकिन कम समय में अच्छा उत्पादन देने वाली किस्मों में पूसा हिमानी, पूसा देसी, पूसा चेतकी, पूसा रेशमी, जापानी सफेद और गणेश सिंथेटिक आदि किस्मों को एशियाई मिट्टी में आराम से उगा सकते हैं.

ऐसे करें मूली के पौधों की रोपाई

मूली की खेती के लिए किसान सीधी बिजाई या नर्सरी तैयार करके दोनों तरीकों से खेती करते हैं. इसकी व्यवसायिक खेती के लिए नर्सरी में उन्नत किस्म के बीजों से पौधे तैयार किये जाते हैं, जिनकी रोपाई करने पर सितंबर से लेकर मार्च तक बढिया उत्पादन किसानों को मिलता है. बता दें कि मूली के पौधों की रोपाई के लिये आमतौर पर कतार विधि का इस्तेमाल किया जाता है. इस बीच लाइन से लाइन के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर और पौधों से पौधों के बीच 8 से 10 सेंटीमीटर की दूरी रखकर ही रोपाई करनी चाहिये.

मूली की फसल में खाद-उर्वरक कैसे डालें  

वैसे तो  मूली की फसल में जैविक खाद और उर्वरकों का प्रयोग करके भी काफी बढ़िया उत्पादन ले सकते हैं. इसकी खेती के लिए 200 से 250 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट, 80 किग्रा. नाइट्रोजन, 50 किग्रा. फास्फोरस, 50 किग्रा. पोटाश का प्रयोग भी मिट्टी की जांच के आधार पर किसान कर सकते हैं. किसान चाहें तो जैव उर्वरक जीवामृत से भी फसल में पोषण प्रबंधन का कार्य करना फायदेमंद रहेगा.

ऐसें करें मूली की फसल में कीट नियंत्रण 

जाहिर है कि मूली एक कंदवर्गीय सब्जी है, जो मिट्टी के अंदर पैदा होती है, इसलिए मिट्टी के रोग लगने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है. खासकर काला लार्वा नामक जड़ कीट मूली के उत्पादन को गिरा सकते हैं. शुरुआती अवस्था में ये लार्वा पत्तियों को खाकर उन में छेद बना देते हैं, जिससे फसल की क्वालिटी और उत्पादन बहुत कम हो सकता है. इसकी रोकथाम के लिए एंडोसल्फान की 20 लीटर को 10 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर फसल पर किसान छिड़क सकते हैं. मूली की फसल में कीट और रोगों की जैविक रोकथाम के लिए नीम-गोमूत्र आधारित कीटनाशक का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदे का सौदा साबित हो सकता है.

मूली की फसल की कटाई और उत्पादन 

मूली एक कम अवधि वाली बागवानी फसल है, जिसकी उन्नत किस्मों से बुवाई करने पर 40 से 50 दिन के अंदर फसल तैयार और जड़ें खाने लायक आराम से हो जाती हैं, इसलिए समय से इसकी खुदाई का काम कर लेना चाहिए. बता दें कि मूली की यूरोपियन प्रजातियों से 80 से 100 क्विंटल और देसी प्रजातियों से 250 से 300 क्विंटल तक उत्पादन आराम से ले सकते हैं. मंडियों में कम से कम कीमत पर भी मूली को 500 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर तक बेचा जाता है. इस तरह प्रति हेक्टेयर खेत में मूली की फसल लगाकर कम समय में  1.5 लाख रुपये का लाभ कमा सकते हैं.

किसान मूली की सह-फसल खेती भी करें 

अभी खेतों में खरीफ सीजन की खाद्यान्न, बागवानी और दलहनी समेत कई नकदी फसलें लगी हुई है. किसान चाहें तो कम लागत में अतिरिक्त आमदनी लेने के लिए मूली की अंतवर्तीय खेती भी कर सकते हैं. इसके लिए खेतों के बीच में या किनारे-किनारे मेड़ बनाकर मूली के बीजों  की बुवाई या पौधों की रोपाई  का काम किया जाता है. इसके लिए अलग से खाद उर्वरक का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि यह बागवानी फसल मुख्य फसल से ही पोषण का इंतजाम भी कर लेती है.

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