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Thai Apple Cultivation: थाई एप्पल बेर कम लागत में जबरदस्त मुनाफे का सौदा, मात्र 6 महीनों 100 किलो तक पैदावार

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Thai Apple Ber Cultivation: भारत में किसान पारंपरिक खेती को छोड़ अब दूसरी फसलों के उत्पादन में रुचि लेने लगे है। चाहे वह बागवानी हो या सब्जी उत्पादन। और भारतीय बाजार में विदेशी फलों की बढ़ती मांग के कारण किसान स्ट्रॉबेरी हो या फिर ड्रैगन फ्रूट की खेती भी व्यापक स्तर पर करने लगे है। क्योंकि इनकी मांग के साथ इनके दाम भी अधिक रहते है। इसी तरह भारत में अब थाई एप्पल बेर , कि खेती में भी बड़ी रुचि लेने लगे है । थाई एप्पल बेर जो दिखने में सेब और स्वाद में बिल्कुल बेर की तरह ही होता है.

बता दे कि थाई एप्पल बेर के एक ही फल का वजन करीब 4- ग्राम से लेकर 120 ग्राम तक ही होता है. यह थाईलैंड देश का फल है, जिसकी बागवानी करना बेहद ही आसान है. किसानों को जानकारी के लिए बता दें कि थाई एप्पल बेर में गजब की रोग प्रतिरोधी क्षमता भी होती है, जिसके चलते फलों में कीट और रोगों का खतरा बहुत कम ही होती है.

कम लागत में अधिक मुनाफा

इस थाई एप्पल बेर की खेती करना बेहद ही आसान है. किसान चाहें तो सिर्फ 50 से 60 हजार की शुरूआती लागत में इसके पेड़ से हर साल 100 किलो तक उत्पादन आराम से ले सकते हैं. बता दें कि बाजार में इसकी मांग तो काफी ज्यादा है, लेकिन छोटे स्तर पर बागवानी होने के कारण थाई एप्पल बेर लोकल बाजार में भी काफी महंगे बेचे जाते हैं. 

थाई एप्पल बेर के लिए उपयुक्त मिट्टी

 बागवानी फसलों की खेती के लिए वर्मी कंपोस्ट की बड़ी अहम भूमिका होती है. उसी तरह थाई एप्पल बेर के लिए कार्बनिक पदार्थों वाली कंपोस्ट खाद सबसे बढ़िया रहती है. किसान चाहें तो क्षारीय और लवणीय मिट्टी में भी एप्पल बेर के पेड़ लगाकर ठीक-ठाक उत्पादन भी ले सकते हैं. बता दें कि थाई एप्पल बेर की प्रजाति के पेड़ों में सूखा की मार झेलने की शक्ति होती है. यही कारण है.इसको रेतीली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है।  

थाई एप्पल बेर के लिए खेत की तैयारी 

दूसरी बागवानी फसलों की तरह ही थाई एप्पल बेर के लिए भी खेत की जुताई करके प्रति पौधा के हिसाब से 5 मीटर दूरी पर 2-2 फीट लंबाई-चौड़ाई वाले वर्गाकार गड्ढों की खुदाई भी की जाती है. इन गड्ढों में 25 दिन तक सौराीकरण भी होता है, जिसके बाद 20 से 25 किलो अच्छी सड़ी हुई या कंपोस्ट खाद, नीम की पत्तियां, नीम की खली और कुछ पोषक तत्व मिलाकर गड्ढों में भी भर दिये जाते हैं. किसान चाहें तो बेहतर उत्पादन के लिये खेत से नमूना लेकर मिट्टी की जांच भी कृषि विज्ञान केंद्र से करवा सकते हैं. 

थाई एप्पल बेर के लिए पौधों की रोपाई 

इस थाई एप्पल बेर की खेती के लिए कलिकायन यानी कलम विधि का इस्तेमाल करके पौधे तैयार भी किये जाते हैं. इसके बाद ही किसान जुलाई से लेकर मार्च के बीच थाई एप्प्ल बेर के पौधों की रोपाई का काम भी कर सकते हैं. बता दें कि 1 बीघा खेत में 15 फीट की दूरी के हिसाब से थाई एप्पल बेर के 80 पौधों की रोपाई भी कर सकते हैं.

किसान चाहें तो थाई एप्पल बेर के बीच खाली पड़े स्थान पर बैंगन, मिर्च, मटर और मूंग जैसी फसलों की खेती भी आराम से कर सकते हैं. इस तरह थाई एप्पल बेर का उत्पादन मिलने से पहले बीच-बीच में खेती की लागत भी निकल सकते हैं.

एप्पल बेर के लिए पोषण प्रबंधन

वैसे तो थाई एप्पल बेर कम उपजाऊ मिट्टी में भी अच्छा उत्पादन भी दे सकते हैं, लेकिन मिट्टी की जांच के आधार पर देसी खाद, सुपर खाद, सुपर फास्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश के अलावा नाइट्रोजन उर्वरकों का भी प्रयोग आप कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों की मानें तो बेर के पौधों की जड़ों में ड्रिप सिंचाई के जरिये पोषक तत्वों की आपूर्ति करके काफी खर्च भी बचा सकते हैं. इसकी खेती के लिये जीवामृत की मदद से भी पोषण प्रबंधन का काम भी कर सकते हैं.

थाई एप्पल बेर का अनुमानित उत्पादन

थाई एप्पल बेर की खेती करने के लिए देसी और हाइब्रिड दोनों तरह को की प्रजातियों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. बता दें कि इस थाई एप्पल बेर की हाइब्रिड प्रजातियों के पौधों की रोपाई करके मात्र 6 महीने के अंदर 100 किलो तक फलों का उत्पादन भी ले सकते हैं. इसकी रोपाई (Thai Apple Ber Cultivation) के साल भर बाद पौधे के परिपक्व होने पर 20 से 25 किलो तक फलों का उत्पादन भी मिल जाता है.

वैसे बाजार में थाई एप्पल को ₹50 प्रति किलो के भाव पर आराम से बेचा जा सकता है. किसान चाहें तो अगले 50 साल तक थाई एप्पल बेर की फसल से बंपर उत्पादन लेकर बढ़िया मुनाफा लगातार कमा सकते हैं.

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