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कपास के किसानों में खुशी की लहर, MSP से करीब दुगुना मिल रहा सफ़ेद सोने का भाव

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Indiajobpost, New Dehli- खरीफ सीजन की मुख्य फसल कपास की इन दिनों मंडियों में आवक शुरू हो गई है। मंडियों में किसानों का सफेद सोना MSP से डबल दामों पर बिक रहा है। जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है। इस बार कई जगह मानसून की पर्याप्त बारिश से कपास और बाजरा का बंपर उत्पादन हुआ है।      

इन दिनों कपास की पहली चुगाई मंडियों व आढ़तियों तक पहुंच भी चुकी है, जहां कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6080 रूपये है तो वही खुले बाजार में कपास 10 हजार 500 से 11 हजार रूपये प्रति क्विंटल के दाम पर बिक रही है। 
हरियाणा की भिवानी अनाज मंडी में भी किसानों को बाजरे व कपास का आढ़तियों के हाथों अच्छा दाम मिल रहा है।भिवानी अनाज मंडी के सुपरवाईजर योगेश शर्मा व आढ़ती नरेंद्र बंसल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ओपन मार्केट में अबकी बार पिछले वर्ष के मुकाबले किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य 6 हजार 80 के मुकाबले 11 हजार रूपये तक नरमा, कपास का दाम किसानों को फिलहाल मिल रहा है। भाव ज्यादा होने के कारण अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कपास की बहुत मांग है व अच्छी बारिश के कारण उत्तम क्वालिटी की कपास पैदा होना भी एक कारण है।

मंडी सुपरवाईजर ने आगे बताया कि एक अक्तूबर से बाजरा व मूंग की सरकारी खरीद शुरू राज्य में होगी। किसान अपना बाजरा सुखाकर ही मंडी में लाए, ताकि उन्हे अच्छा दाम मिल सकें। अबकी बार बाजरा का सरकारी भाव 2350 रूपये तक तय किया गया हैं। हालांकि माना जा रहा है कि ओपन मार्केट में आने वाले दिनों में बाजरा भी MSP भाव से अधिक बिकेगा।

वही भिवानी जिला के गांव अजीतपुर के किसान दिलबाग, कितलाना के किसान विनोद व सुनील ने मीडिया से बताया कि उन्हे ओपन मार्केट में उनकी कपास के भाव 11 हजार रूपये तक भी मिले है। ये भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब दोगुने है। ऐसे में उन्हे अबकी अपनी फसल के अच्छे दाम भी मिले है, जिससे उन्हे काफी लाभ भी हुआ है।

यदि इसी प्रकार भाव मिलते रहे तो वे अगले वर्ष भी कपास की पैदावार अधिक करेंगे। किसानों का यह भी कहना था कि कपास उत्पादन में लागत बढऩे तथा कपास चुगाई की मजदूरी बढऩे के कारण कपास उत्पादन की लागत भी बढ़ी है, परन्तु न्यूनतम समर्थन मूल्य से दोगुने भाव मिलने के बाद अब वे अच्छा लाभ अर्जित कर पा रहे हैं।

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