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ई- ट्रेडिंग के नाम पर मंडियां बंद करने की हो रही बड़ी साजिश, खुले बाजारों में फसलों के भाव अधिक

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अगर अनाज का व्यापार बड़े घरानों के हाथों में चला गया तो देश में जो खुला आटा जो अब 28 रुपए प्रति किलो के भाव में बिक रहा है, वह 60 रुपए प्रति किलो तक हो जाएगा. उन्होंने कहा कि कभी केंद्र सरकार तीन कृषि कानून लाकर किसान व आढ़तियों को बर्बाद करने की साजिश रच रही थी और कभी ई-ट्रेडिंग के नाम पर आढ़ती व किसानों को अब तंग किया जा रहा है.

देश की केंद्र व राज्य सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कई तरह की योजनाए लेकर आती रहती है। जिसका लाभ किसानों को मिलने की बात भी करती है। पर अब हरियाणा राज्य के व्यापार मंडल ने केंद्र व राज्य सरकार पर मंडी व्यापारियों और किसानों के मध्य सबंध खराब करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। हरियाणा के व्यापार मण्डल के प्रांतीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव बजरंग गर्ग ने मीडिया से बातचीत में बताया कि किसान और आढ़तियों का सालों पुराना नाता है वे सदा एक दूसरे के सुख-दुख के साथी रहे हैऔर आगे भी रहेगे। उन्होंने बताया की सरकार किसानों की हर फसल ई-ट्रेडिंग के माध्यम से खरीद करने की बात भी कर रही है, जो बहुत गलत है. जिसे कतई सहन नहीं किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि किसानोंं को खुले बाजारों में उनकी फसल के दाम ज्यादा मिलते हैं. जैसे कि गेहूं का MSP 2015 है और किसान खुले बाजार में 2400 से 2500 तक बेच रहे है।  

 60 रुपये किलो तक हो जाएगा आटा

हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने बताया कि सरकार अनाज का व्यापार देश के बड़े-बड़े घरानों को देना चाहती है. अगर अनाज का व्यापार बड़े घरानों के हाथों में चला गया तो देश में जो खुला आटा जो अब 28 रुपए प्रति किलो के भाव में बिक रहा है, वह 60 रुपए प्रति किलो तक हो जाएगा. उन्होंने कहा कि कभी केंद्र सरकार तीन कृषि कानून लाकर किसान व आढ़तियों को बर्बाद करने की साजिश रच रही थी और कभी ई-ट्रेडिंग के नाम पर आढ़ती व किसानों को अब तंग किया जा रहा है. जबकि किसान की फसल मंडी में खुली बोली में बिकने से किसान को अपनी फसल के दाम अधिक मिलेंगे.

किसानों को भुगतान की कोई उचित व्यवस्था नहीं

हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने आगे कहा कि ई-ट्रेडिंग के माध्यम से फसल बिकने से अन्य राज्यों का व्यापारी किसान की फसल खरीदेगा तो कैसे अनाज का उठान होगा और किसान को अपनी फसल का भुगतान कैसे मिलेगा, यह बहुत बड़ा चिंता का विषय भी है. बजरंग गर्ग ने कहा कि सरकार किसानों की फसल खरीदने पर कई-कई महीने तक भुगतान भी नहीं करती. जबकि सरकार द्वारा किसान की फसल का भुगतान व मंडियों से उठान 72 घंटे के अंदर अंदर करने का कानून बनाया भी हुआ है.

उन्होंने आगे कहा कि ना तो गेहूं व धान का उठान 72 घंटे तक होता है और ना ही फसल का भुगतान 72 घंटे में होता है. जबकि सरकार द्वारा गेहूं खरीद आढ़तियों का कमीशन व पल्लेदारों की मजदूरी देने में एक साल तक का समय लगा देते हैं. गर्ग ने कहा कि अगर सरकार का व्यापारियों की तरफ कोई पैसा बकाया होता है तो सरकार उन पैसों का ब्याज व पैनल्टी तक लेती है. जबकि आढ़ती, किसान व मजदूरों को पेमेंट लेट करने पर सरकार किसी प्रकार का ब्याज तक नहीं देती, जो बहुत गलत है

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