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ई ट्रेडिंग अनाज के विरोध में उतरे व्यापारी, सरकार के आदेश को बता रहे गलत

सरकार को किसान की फसल पहले की तरह खुली बोली पर खरीद और बेचने का नियम बनाना चाहिए और गेट पास भी ऑनलाइन नहीं कटना चाहिए और हर फसल की खरीद पर आढ़तियों को 2.5 प्रतिशत पूरी आढ़त मिलें. 
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हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेशअध्यक्ष और अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव बजरंग गर्ग ने बताया कि सरकार किसान व व्यापारियों को नाजायज तंग करने के लिए अनाज की खरीद ई ट्रेडिंग के द्वारा से करने का जो फरमान जारी कर दिया है वह गलत है. सरकार को किसान की फसल पहले की तरह खुली बोली में खरीद और बेचने का नियम होना चाहिए और गेट पास भी ऑनलाइन नहीं कटना चाहिए और हर फसल की खरीद पर आढ़तियों को 2.5 प्रतिशत पूरी आढ़त दी जाए.

बजरंग गर्ग ने बताया कि पहले धान पर मार्केट फीस और एचआरडीएफ दोनों मिलाकर 1 प्रतिशत थी जिसे बढ़ाकर 4 प्रतिशत हुई है. सरकार को धान पर मार्केट फीस पहले की तरह 1 प्रतिशत होनी चाहिए.उन्होंने आगे बताया कि ना तो गेहूं और धान का उठान 72 घंटे होता है और ना ही फसल का भुगतान 72 घंटे में हो पाता है. जबकि सरकार द्वारा गेहूं खरीद आढ़तियों का कमीशन और  पल्लेदारों की मजदूरी देने में एक वर्ष तक लगा देते हैं. गर्ग ने बताया कि अगर सरकार का व्यापारियों की तरफ कोई पैसा बकाया होता है तो सरकार उन पैसों का ब्याज और पैनल्टी तक ली जाती है. जबकि आढ़ती, किसान और मजदूरों को पेमेंट लेट करने पर सरकार किसी प्रकार का ब्याज नहीं मिलता, जो गलत है.

72 घंटे के अंदर नहीं होता है भुगतान

गौरतलब है कि इसस पहले हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने बताया कि ई-ट्रेडिंग पर फसल की बिक्री होने से व्यापारी अगर किसानों की फसल खरीद की जाती हैं तो अनाज का भुगतान और उसका उठाव कैसे होगा यह यह बड़ी चिंता है. बजरंग गर्ग ने बताया कि सरकार किसानों की फसल खरीदने पर कई-कई महीने भुगतान नहीं होता है. जबकि सरकार द्वारा किसान की फसल का भुगतान और मंडियों से उठान 72 घंटे के अंदर अंदर करने का कानून होता है.

किसानों को बर्बाद करने की हो रही साजिश

बजरंग गर्ग ने पहले ही सरकार पर आरोप लगाते हुए बताया कि सरकार अनाज का व्यापार बड़े-बड़े घरानों को देना चाहती है. क्योंकि अगर अनाज का कारोबार बड़े घरानों के हाथ में चला जाएगा तो महंगाई ओर बढ़ने वाली है. खुले में 28 रुपये प्रति किलो बिकने वाला आटा 60 रुपये में बिकेगा. उन्होंने बताया कि तीन कृषि कानूनों को लाकर देश के किसानो को व्यापारियों को को बर्बाद करने की साजिश हो रही है. उन्होंने बताया कि सरकार ई-ट्रेडिंग के नाम पर आढ़ती व किसानों को तंग कर रही है. जबकि किसान की फसल मंडी में खुली बोली में बिकने से किसान को अपनी फसल के दाम अधिक मिलेंगे.

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