india job post

Vegetable Farming: किसान हल्के ठंडे मौसम में करें इन सब्जियों की खेती, अभी करें बुवाई और पाए जबरदस्त मुनाफा

 | 
"Agriculture News, Horticulture, vegetable farming, Kheti kisani, Kisan news, seasonal vegetable farming, vegetable farming in September, vegetable farming in October, vegetable production, vegetable yields, winter vegetables, vegetable farming in winter,,सब्जियों की खेती, मौसमी सब्जी की खेती, सितंबर में सब्जी की खेती, अक्टूबर में सब्जी की खेती, सब्जी उत्पादन, सब्जी की खेती, सर्दियों की सब्जियां, सर्दियों में सब्जी की खेती, बागवानी, कृषि समाचार, खेती किसानी, किसान समाचार

Indiajobpost, Agriculture: देश भर में इन दिनों खरीफ सीजन अपने अंतिम पड़ाव पर है। किसान फसलों के प्रबंधन में लगे हुए है। ताकि समय से अगली फसल बोई जा सके। कई किसान रबी सीजन में सब्जी की खेती भी करते है। उसकी बीजाई के लिए यह एकदम उपयुक्त समय है। इस समय में किसान सब्जी की फसलों की नर्सरी तैयार करके बुवाई का काम कर सकते हैं.       

दरअसल रबी सीजन की सब्जियों की बुवाई के लिए कम तापमान सबसे उपयुक्त रहता है और इन्हें पकने के लिए खुश्क और हल्के गर्म तापमान की आवश्यकता होती है. यही कारण है कि इन सब्जियों को सितंबर के अंत से नवंबर के समयकाल तक बोया जाता है. इन सीजनल सब्जियों में आलू, लहसुन, प्याज, शिमला, मिर्च, टमाटर, फूलगोभी, गांठ, गोभी, पालक, मेथी, धनिया, गाजर, मूली और मटर मुख्य रूप से शामिल हैं.

आलू की खेती 

आपको बता दें कि आलू की बुवाई के लिए 10 अक्टूबर से लेकर मध्य नवंबर तक का समय सबसे उपयुक्त भी रहता है. इस समय आलू की कुफरी अशोका, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी जवाहर किस्मों से बुवाई करके बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. आलू के बीजों की बुवाई से पहले किसान खेत में 80 से 100 किग्रा. नाइट्रोजन, 70 से 80 किग्रा. फास्फेट और 80 से 120 किग्रा. पोटाश प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मिट्टी में अच्छे से डालें. किसान चाहें तो गोबर की खाद और वर्मी कंपोस्ट का उपयोग भी कर सकते हैं. प्रति हेक्टेयर खेत के लिए 20 से 25 क्विंटल तक आलू के बीजों की खपत होती है.

मटर की खेती 

देश में मटर की खेती रबी सीजन में ही की जाती है, लेकिन इसकी मांग बाजार में साल भर तक बनी रहती है. किसानों को मटर के बेहतर उत्पादन लेने के लिए उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिये. बता दें कि मटर की अगेती किस्म की बुवाई के लिए 120 से 150 किग्रा. प्रति हेक्टेयर बीज और पछेती किस्मों खेती के लिये 80 से 100 किलोग्राम तक बीजों का प्रयोग किया जाता है. मटर की बंपर उपज के लिये खेत में गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट के अलावा 30 किग्रा नाइट्रोजन, 50 किग्रा. फास्फेट और 40 किग्रा. फास्फोरस प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालने की सलाह किसानों को दी जाती है.

लहसुन की खेती 

लहसुन को प्रमुख नकदी फसल है, जिसकी बुवाई के लिए करीब 500 से 700 किग्रा प्रति हेक्टेयर तक बीजों की आवश्यकता पड़ती है. लहसुन की बुवाई कतारों में ही करनी चाहिए. इसके लिए लाइन से लाइन के बीच 15 सेंटीमीटर और पौध से पौध के बीच 7.5 सेंटीमीटर की दूरी रखकर बीजों की बुवाई भी करनी चाहिए. लहसुन की बुवाई से पहले कंदों का उपचार करने की सलाह भी दी जाती है.

गोभीवर्गीय सब्जियों की बुवाई 

आपको बता दे कि यह समय गोभी वर्गीय सब्जियों की पौधशाला तैयार करने के लिए भी सबसे सही रहता है. इस समय फूल गोभी, पत्ता गोभी, गांठ गोभी और ब्रोकली की बुवाई करके अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं. इन सभी सब्जियों की बुवाई के लिए उन्नत किस्म के बीजों का इस्तेमाल भी करें. वहीं नर्सरी तैयार करने के बाद 20 से 30 दिनों के अंदर कतार विधि का प्रयोग करके खेतों में रोपाई भी कर सकते हैं. इसकी रोपाई के लिए लाइनों के बीच 30 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 20 सेंटीमीटर का फासला जरूर रखें. खेतों में पौधों की बुवाई या रोपाई से पहले 35 किग्रा. नाइट्रोजन, 50 किग्रा. फास्फेट और 50 किग्रा. पोटाश के साथ गोबर की खाद और वर्मी कंपोस्ट डालकर मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करना चाहिये.

शिमला मिर्च की खेती 

यह समय शिमला मिर्च की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त भी है. किसान भाई चाहें तो पॉलीहाउस, लो टनल या प्लास्टिक मल्चिंग के सहारे भी शिमला मिर्च की खेती अच्छे से कर सकते हैं. इसके उन्नत किस्म के पौधों को  नर्सरी में तैयार करके खेत में रोपाई करने पर बढ़िया परिणाम सामने आते हैं. शिमला मिर्च के पौधों की रोपाई के 20 दिन और 40 दिन बाद 25 किग्रा. नाइट्रोजन या 54 किग्रा. यूरिया के टॉप ड्रेसिंग करने की सलाह भी दी जाती है. किसान भाई चाहे तो वर्मी कंपोस्ट, वर्मी वाश, अजोला या नीम से बने जैव उर्वरक की भी टॉप ड्रेसिंग भी फसल कर सकते हैं.

टमाटर की खेती 

 भारत में टमाटर एक सदाबहार फसल के रूप में उगाई जाती है. आधुनिक तकनीकों की मदद से अब वर्ष में कई बार टमाटर की फसल ली जाती है. उसी प्रकार रबी सीजन में भी टमाटर की रोपाई के लिए पहले से ही इसकी पौधशाला तैयार करनी होती है. इसकी रोपाई से पहले खेतों में 40 किग्रा. नाइट्रोजन, 50 किग्रा. फास्फोरस और 14 किग्रा. पोटाश का प्रयोग खेत में किया जाता है. टमाटर की फसल से अच्छी पैदावार के लिए 55 से 60 किग्रा. नाइट्रोजन का प्रयोग भी किसान कर सकते हैं. वैसे तो टमाटर की खेती जैविक विधि से भी कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले मिट्टी की जांच करवाके जैविक खाद और जैव उर्वरकों का संतुलित मात्रा में उपयोग किया जाता है. टमाटर के उन्नत किस्म के प्रमाणित बीजों का चयन करके पौधों की रोपाई कतारों में भी की जाती है.

रोजाना मंडी भाव के लिए यहां टच कर व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़े

Also Read: Rabi Crops Weeds: रबी सीजन की फसलों में उगने वाले खरपतवार की रोकथाम के उपाय

Also Read: मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना: सरकार की इस स्कीम से 7.5 लाख किसानों को बिजली बिल्कुल फ्री