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Edible oil: आम ग्राहकों को राहत तो किसानों का नुकसान, त्यौहारी सीजन से पहले और नीचे आएंगे तेल के भाव

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देश में आगामी दीपावली की तैयारियां अब शुरू भी हो गई है. इस बीच खाद्य तेलों के अधिक दामों से जूझ रहे उपभाेक्ताओं के लिए बड़ी खबर सामने निकल कर आई है. और अब उम्मीद की जा रही है कि महंगाई से परेशान लोगों को त्यौहारी सीजन में कुछ राहत भी मिल सकती है. जिसके तहत दीपावली में खाद्य तेलों के दाम में गिरावट होने का अनुमान भी है. यह बड़ी जानकारी अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने भी दी है. लेकिन, यह गिरावट एक तरफ जहां उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर भी लेकर आई है. तो वहीं दूसरी तरफ देश के किसानों के लिए यह चिंता भी लेकर आई है. आईए समझते हैं कि खाद्य तेलों के दाम गिरने के पीछे के अनुमान का ये गणित क्या हैं और यह राहत किसानों के लिए कैसे आफत भी बन सकती है.

देश में 11 महीने के उच्चतम स्तर पर पाम ऑयल का आयात

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने देश में दीपावली से पहले खाद्य तेलों के दामों में गिरावट के अनुमान संबंधी गणित को बारीकी से समझाया है. बकौल ठक्कर के मुताबिक भारत का पाम ऑयल आयात एक महीने पहले की तुलना में अगस्त में लगभग दोगुना होकर 11 महीने के उच्च स्तर पर भी पहुंच गया है. इसके पीछे का कारण बताते हुए वह कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार दामों का गिरना एवं मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच पाम तेल बेचने की छिड़ी जंग के चलते आयात में अधिक इजाफा हुआ है.

ठक्कर कहते है कि दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातक द्वारा पाम ऑयल की अधिक खरीद से इसके वायदा कारोबार को कुछ समर्थन भी मिल सकता है. वहीं शीर्ष उत्पादक इंडोनेशिया को बैलूनिंग इन्वेंट्री को कम करने में भी मदद मिल सकती है. उन्होंने बताया कि औसत अनुमान के मुताबिक, अगस्त में भारत का पाम ऑयल आयात एक महीने पहले से 94 फीसदी बढ़कर 1.03 मिलियन तक टन हो गया.

पाम ऑयल उपभोक्ताओं के लिए सस्ता 

वहीं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण जैन इस मामले को लेकर बताते हैं कि अन्य तेलों की तुलना में पाम ऑयल बहुत किफायती भी हो गया है. पिछले महीने दामों में अंतर तेजी से बढ़ा है. कच्चे पाम ऑयल की पेशकश लागत, बीमा और माल ढुलाई (सीआईएफ) सहित 1,011 डॉलर प्रति टन तक की जा रही है, जबकि कच्चे सोया तेल के लिए 1,443 डॉलर की तुलना में यह बहुत कम भी है. अक्टूबर के अंत तक शुल्क मुक्त निर्यात की अनुमति देने के इंडोनेशिया के कदम ने बाजार में आपूर्ति में वृद्धि की और कीमतों में भी कमी की, अप्रैल-मई में, इंडोनेशिया निर्यात को प्रतिबंधित कर रहा था. अब यह हो गया है स्टॉक को घटाने के लिए बाजार में बाढ़ सी आ गई है.

देश के किसानों की ऐसे बढ़ेगी परेशानी

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने खाद्य तेलों के दाम कम हाेने से किसानों को होने वाले नुकसान के गणित को सही समझाते हुए कहते हैं कि भारत सरकार द्वारा आयात शुल्क कमी के आदेश की सीमा बढ़ाने से आयात आगे भी बड़े पैमाने पर भारत में होगी. जिससे नई फसल लेकर बाजारों में आने वाले किसानों को फसल के दाम उनकी सोच से काफी कम भी मिलेंगे और अगली फसल के लिए फिर किसान दो बार जरूर सोचेगा. इसलिए सरकार को चाहिये कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेलों के दाम ज्यादा गिरने पर आयात शुल्क के बारे में उचित निर्णय भी ले. अन्यथा सरकार की भारत को तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की सोच धरी की धरी ही रह जाएगी.

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