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भयानक आंकड़े, किसानों से कहीं अधिक कारोबारियों ने किए बीते 5 साल में सुसाइड, इस दौरान हुई अधिक मौतें

NCRB Data: कारोबारियों के आत्महत्या करने के मामलों में कर्नाटक का नाम सबसे पढ़ले आता है. कुल आत्महत्या के मामलों में 14.3 फीसदी कारोबारी यहीं के थे. दूसरा स्थान 13.2 प्रतिशत के साथ महाराष्ट्र और वहीं तीसरे स्थान पर 11.3 प्रतिशत के साथ मध्य प्रदेश आता है. चौथे और पांचवे नंबर पर क्रमश: तमिलनाडु और तेलंगाना का नाम हैं.
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कोरोना महामारी के प्रकोप का असर वैसे तो सभी क्षेत्रों और लोगों पर था, परंतु आंकड़े बताते हैं कि देश का कारोबारी वर्ग इसका कहीं अधिक शिकार हुआ हैं. लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान कारोबार बंद होने के चलते वित्तीय संकट (Financial Crisis) का ऐसा पहाड़ टूटा कि वे आत्महत्या (Suicide) करने को मजबूर हो गए. यह हम नहीं कह रहे, बल्कि आर्थिक राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बता रहे हैं. इनके मुताबिक, कोरोना काल में किसानों से ज्यादा आत्महत्याएं कारोबारियों द्वारा की गई हैं.  

12,055 कारोबारियों ने किया सुसाइड

आर्थिक राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के नए आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में कुल 12,055 कारोबारियों ने किसी ना किसी कारण से Suicide करत लिया है. यह आंकड़ा वर्ष 2020 में 11,716 कारोबारियों का था. 2020 कुल आत्महत्या से होने वाली मौतों के डाटा को देखें तो इसमें 7.2 फीसदी बढ़ा है. उद्यमियों पर किए गए एक सर्वे के आंकड़ों को भी इस रिपोर्ट में शमिल किया गया है. 

10,881 किसानों द्वारा की आत्महत्या 

एनसीआरबी के अनुसार, कॉरपोरेट सेक्टर में होने वाली मौतों की संख्या किसानों (Farmers Suicide) की तुलना कहीं अधिक थी. वर्ष 2021 में देश में कुल 10,881 किसानों की आत्महत्या से मौत होने की सूचना मिली. विश्लेषण में जो बड़ी बात समाने आई, उसके अनुसार वर्ष 2018 के आंकड़ों की तुलना में वर्ष 2021 में स्वरोजगार करने वाले उद्यमियों की आत्महत्या के मामलों में 54 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 

साल-दर-साल आंकड़ा

वर्ष    कारोबारी    किसान

2015    8,780    12,602

2016    8,573    11,379

2017    7,778    10,655

2018    7,990    10,349

2019    9,052    10,281

2020    11,716    10,677

2021    12,055    10,881

कर्नाटक इस मामले में सबसे ऊपर

कारोबारियों के आत्महत्या के मामलों में देश का कर्नाटक राज्य सबसे पहला नंबर आता है. कुल मामलों में से 14.3 फीसदी कारोबारी कर्नाटक से थे. इसके बाद 13.2 फीसदी के साथ महाराष्ट्र (Maharashtra) दूसरे और 11.3 फीसदी के साथ मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) तीसरे नंबर पर आता है. इसके बाद सबसे अधिक कारोबारियों ने आत्महत्या तमिलनाडु (Tamil Nadu) और तेलंगाना (Telangana) राज्यों में की. 9.4 फीसदी के साथ तमिलनाडु चार और 7.5 फीसदी के साथ तेलंगाना पांचवें स्थान पर आता है. 

आत्महत्या की दर में इजाफा

बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल आत्महत्या दर (Suicide Rate) साल 2017 में 9.9 प्रति 1 लाख लोगों से बढ़कर साल 2021 में 12 प्रति 1 लाख  लोग पहुँच गई है. आत्महत्या से मरने वाले लोगों में दैनिक वेतन भोगियों का सबसे बड़ा वर्ग आता था. एनसीआरबी की ओर से कहां गया कि 2021 में 12,055 कारोबारियों की आत्महत्या के कुल आंकड़े में से 4,532 विक्रेताओं (Vendors), 3633 व्यापारियों (Tradesmen) और अन्य व्यवसायों में लगे 3,890 व्यक्तियों ने आत्महत्या की गई है. 

सुसाइड के मामलों के पीछ कारण

NCRB डाटा में कारोबारियों की मौत के कारण का उल्लेख बताया गया है कि इनके पीछे का प्रमुख कारण दिवालिया और कर्ज का बोझ बढ़ना ही है. EY की एक रिपोर्ट के अनुसार तो 1,000 छोटे और लघु उद्यमियों (MSME) पर किए गए सर्वे में कोरोना के कारोबार पर पड़े प्रभावों की पूरी तस्वीर आई है. इसमें शामिल करीब 70 फीसदी उत्तरदाताओं ने कोविड -19 महामारी के दौरान कम ऑर्डर, व्यापारिक घाटा, कच्चे माल की उपलब्धता में कमी जैसे तमाम मुद्दों के कारण भारी नुकसान होने की और संकेत किया है. 

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