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अगर आप में भी है ये आदतें तो नहीं बचेगा पैसा! इस तरह पाएं छुटकारा

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फिजूल खर्च

कई बार कमाई तो बहुत होती है, सैलरी भी अच्छी होती है... फिर भी पैसे नहीं बचते. अधिकतर नौकरी-पेशा लोगों की यही शिकायतें रहती हैं. इसके साथ साथ एक और बहाना होता है कि पैसे इसलिए नहीं बचा पाते हैं, क्योंकि खर्चे बहुत अधिक है. लेकिन ऐसे लोग 'खर्च' और 'फिजूल खर्च' में फर्क नहीं कर सकते हैं. 

दरअसल, हर किसी के लिए रोटी, कपड़ा और मकान सबसे पहले और सबसे जरूरी जरूरत होती है. परंतु आज के मॉडर्न युग में आमदनी बढ़ते ही खर्चे भी बढ़ जाते हैं. लाइफस्टाइल में बदलाव आता है. ऐसे में जब कम आमदनी थी, तब भी जेब खाली होती थी, और जब आमदनी बढ़ गई तब भी एक रुपया नहीं बचता हैं. 

इस बीच एक बड़ा सवाल आता है कि 'खर्च' और 'फिजूल खर्च' की पहचान किस तरह करें? एक आदमी के लिए जो फिजूल खर्च करता है, वो दूसरे आदमी के लिए जरूरी खर्च होता है. ऐसे में दोनों को अलग-अलग करने का एक बेहद आसान तरीका यह है कि हर आदमी को यह मानकर चलना चाहिए, कि वो किसी न किसी तरह से फिजूल खर्च कर रहा है. एक अनुमान के अनुसार, अधिकतर लोग अपनी आमदनी और सैलरी का 10-20 फीसदी हिस्सा फिजूल खर्ची में उड़ाते हैं.

फिजूल खर्च किस तरह बचाएं?

उदाहरण के तौर पर 50 हजार रुपये महीने की आदमनी वाला इंसान हर महीने कम से कम 5000 रुपये फिजूल खर्च कर देता है, जिसे वो रोक सकता है. आप भी विचार कीजिए और महीने भर के उन खर्चों को जोड़ना चाहिए, जो बेहद जरूरी नहीं है, लेकिन उसपर आप खर्च करते हैं. आपका भी आंकड़ा 10 से 20 फीसदी के बीच आएगा. हम यहां कुछ उदाहरण दे रहे हैं, जिसे आप फिजूल खर्च मान सकते हैं. हालांकि कुछ लोगों के लिए यह जरूरी खर्च हो सकता है लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए यह फिजूल खर्ची के दायरे में ही आता है, जिसे वो आसानी से रोक लगा सकते हैं. 

बाहर खाना: बड़े शहरों में बाहर खाने का कल्चर बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है. अब तो लोग घर बैठे ऑनलाइन खाना मंगवाते हैं. हालांकि कभी-कभी खाना मंगाकर खाना मजबूरी होती है. परंतु अधिकतर टाइम लोग मेहनत से बचने के लिए खाना बाहर जाकर खाते हैं. इस पर लगाम लगाई जा सकती हैं. बाहर जितने पैसे खाने पर खर्च करते हैं, उससे एक चौथाई की लागत पर घर में खाना बन जाता है. 

घूमना: अक्सर लोग देश-विदेश घूमने में मोटी रकम खर्चते हैं. वैसे सालभर में दो बार घूमना आर्थिक बजट में अधिक असर नहीं डालता है. लेकिन कुछ लोग हर महीने Fun के नाम पर घूमने निकले जाते हैं. फिर ऐसे लोगों की सबसे बड़ी शिकायत होती है कि पैसे नहीं बचते हैं. आप खुद सोचें कि इस चक्कर में आप हर महीने कितने खर्च होते हैं. 

बिना जरूरत की चीजें खरीदना: अक्सर लोग ऐसी चीजों को खरीदते हैं, जो उनके लिए जरूरी नहीं होती है. फिर बाद में पछतावा करते हैं. खासकर लोग महंगे गैजेट्स खरीदते हैं और फिर इस्तेमाल नहीं कर पाते है. ऐसे खर्च लगभग लोग ऑफर और जेब में क्रेडिट कार्ड होने के कारण से करते हैं. जिसपर लगाम लगाना सबसे जरूरी है. इस खर्च को आप फिजूल खर्ची की कैटेगरी में आता हैं. 

बिना लिस्ट शॉपिंग

शॉपिंग: जब आप बाजार जाते हैं, तो खरीदने होते हैं दो कपड़े, और खरीद डालते हैं चार. क्योंकि उस समय दिमाग कहीं और होता है. इसलिए जब भी शॉपिंग के लिए जाएं तो लिस्ट बनाकर घर से जाना चाहिए. ऑफर के चक्कर में न पड़ें. इसके साथ साथ सबसे महंगी और सबसे सस्ती चीजें खरीदने की आदत बदल डालें. लोग ब्रांड के चक्कर में बहुत अधिक पैसे खर्च कर देते हैं. वो इसे अपने स्टे्टस से जोड़कर देखा जाता हैं, लेकिन ये सीधा फिजूल खर्ची में आता है. 

शराब और सिगरेट: यह आदतें सेहत के साथ-साथ जेब के लिए भी हानिकारक होती है. परंतु लोग मानते नहीं हैं. कुछ लोगों की पार्टी तो बिना शराब-सिगरेट की पूरी नहीं होती है, जो सरासर फिजूल खर्ची है. लोग हजारों रुपये हर महीने इस मद पर खर्च करते हैं. 

इसके साथ लोग स्पॉ, सैलून, मूवी के पीछे भी जरूरत से ज्यादा खर्च करते हैं. जब सैलून जाते हैं, उन्हें केवल सेविंग बनवाना होता है. परंतु वहां वो फेशियल, ब्लीचिंग करवा लेते हैं. साथ ही अक्सर उस तरह के सैलून में जाते हैं तो बेहद महंगे हैं. इन खर्चों को आसानी से बच सकते है. इसलिए आप खुद एक लिस्ट बनाएं कि क्या जरूरत है और क्या नहीं करने से कोई नुकसान ना हो.

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